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घेरण्ड संहिता • अध्याय 2 • श्लोक 12
पादौ च भूमौ संस्थाप्य पृष्ठपार्श्वे निवेशयेत्‌ । स्थिरकायं समासाद्य गोमुखं गोमुखाकृतिः ॥
(गोमुखासन क्या है-) दोनों पैरों को भूमि पर स्थापित करके पीठ के पार्श्वभागों में लगाना चाहिये, शरीर को स्थिर करके आकृति गोमुख क समान हो जाती है, यही गोमुखासन है।
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