(स्वस्तिकासन की विधि बताते हैं-) दोनों पादतलों (पैरों) और जानुओं (पिंडलियों) को जाँधों के मध्य में करके ऋजुकाय रूप (त्रिकोणाकाररूप) में बैठे, इसे स्वस्तिकासन कहा जाता है।
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