जिस प्रकार घटीयन्त्र गवों (चक्रों) के वश से नित्य ऊपर और नीचे घूमता है, उसी प्रकार कर्म के वश से पुन:-पुन: जन्म और मृत्यु के साथ यह जीव भी घूमा करता है।
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