न जायते वार्द्धकं च ज्वरा नेव प्रजायते ।
भवेत्स्वच्छन्ददेहश्च कफदोषं निवारयेत् ॥
(इस अभ्यास योग से) वार्द्धक्य उत्पन्न नहीं होता है, न ही जरा या जीर्णता आती है। शरीर स्वच्छन्द या सुदूढ़ रहता है (इस प्रकार) कफदोष का निवारण करना चाहिये।
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