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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 60
शीत्कृत्य पीत्वा वक्त्रेण नासानालेविरेचयेत्‌ । एवमभ्यासयोगेन कामदेवसमो भवेत्‌ ॥
(शीत्क्रम कपाल भाति का अर्थ करते हैं-) शीत्कार करते हुए मुख से जल पीकर पुन: नासिका छिद्रों से विरेचन करे। इस प्रकार के अभ्यास योग से व्यक्ति कामदेव के समान हो जाता है।
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