मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 59
नासाभ्यां जलमाकृष्य पुनर्वक्त्रेण रेचयेत्‌ । पायं पायं व्युत्क्रमेण श्लेष्मदोषं निवारयेत्‌ ॥
(व्युत्रमकपालभाति क्या है-) दोनों नासिका छिद्रों से जल को खींचकर पुन: मुख से उसे रेचन करना--निकालना चाहिये। पुनः व्युत्क्रम या उल्टे क्रम से मुख से पी-पी कर नाक से जल को गिराये। इस प्रकार श्लेष्मदोष का निवारण करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें