(व्युत्रमकपालभाति क्या है-) दोनों नासिका छिद्रों से जल को खींचकर पुन: मुख से उसे रेचन करना--निकालना चाहिये। पुनः व्युत्क्रम या उल्टे क्रम से मुख से पी-पी कर नाक से जल को गिराये। इस प्रकार श्लेष्मदोष का निवारण करना चाहिये।
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