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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 58
पूरकं रेचकं कृत्वा वेगेन न तु चालयेत्‌ । एवमभ्यासयोगेन कफदोषं निवारयेत्‌ ॥
पूरक और रेचक का यह क्रम वेग से नहीं (अर्थात्‌ धीरे-धीरे) चलाना या करना चाहिये। इस प्रकार अभ्यास से कफदोष का निवारण होता है।
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