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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 48
प्रमेहञ्च उदावर्त्तं क्रूरवायुं निवारयेत्‌ । भवेत्स्वच्छन्ददेहश्च कामदेवसमो भवेत्‌ ॥
(इससे) प्रमेह, उदावर्त, और कुपित वायु का निवारण करना चाहिये। इससे देह स्वच्छन्द होता है तथा व्यक्ति कामदेव के समान रूपवान्‌ हो जाता हैं।
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