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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 46
जलबस्तिः शुष्कबस्तिर्बस्तिः स्यादद्विविधा स्मृता । जलबस्तित जले कुर्याच्छुष्कबस्ि सदा क्षितौ ॥
(अब बस्ति प्रकार बताते हैं-) जलबस्ति और शुष्कबस्ति, इस प्रकार बस्ति दो प्रकार की कही गयी है। जलबस्ति को जल में तथा शुष्कबस्ति को भूमि में करना चाहिये।
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