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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 45
वारयेत्कोष्ठकाठिन्यमामाजीर्ण निवारयेत्‌ । कारणं कान्तिपुष्ट्योश्च वह्निमण्डल दीपनम्‌ ॥
(इस शोधन क्रिया से) उदर की काठिन्यता का और अजीर्ण का निवारण करना चाहिये। यह कान्ति और पुष्टि की कारक तथा जठराग्नि की प्रदीप्त करने वाली है।
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