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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 44
पीतमूलस्य दण्डेन मध्यमाङ्गुलिनापि वा । यत्मेन क्षालयेद्‌ गुह्यं वारिणा च पुनः पुनः ॥
पीतमूल (हल्दी) के दण्ड से या मध्यम अङ्गुलि से यत्नपूर्वक जल से पुन:-पुनः गुह्यस्थान (मलद्वार) को धोना (साफ करना) चाहिये।
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