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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 43
अपानक्रूरता तावद्यावन्मूलं न शोधयेत्‌ । तस्मात्सर्वप्रयत्मेन मूलशो धनमाचरेत्‌ ॥
(मूलशोधन का लक्षण करते हैँ-) जब तक मूल शोधन नहीं होता (उदर शौच साफ नहीं होता) तब तक अपानवायु की क्रूरता रहती है अर्थात्‌ अपानवायु कष्टकारक बनी रहती है। अत: प्रयत्न पूर्वक मूल का शोधन करना चाहिये।
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