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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 4
नास्ति मायासमः पाशो नास्ति योगात्परं बलम्‌ । नास्ति ज्ञानात्परो बब्धुर्नाहङ्कारात्परो रिपुः ॥
माया के समान (इस संसार में) कोई पाश नही है, तथा योग से श्रेष्ठ (दूसरा) कोई बल नही है, ज्ञान से श्रेष्ठ अन्य कोई बन्धु नही है और अहंकार से बड़ा कोई शत्रु नही हैं।
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