कफपित्तं तथा क्लेदं रेचयेदूर्ध्ववर्त्मना ।
दण्डधौतिविधानेन हृद्रोगं नाशयेद् ध्रुवम्
(अब दण्डधौति का अर्थ करते हैं-) कफ, पित्त और क्लेद (घबराहट) को मुखमार्ग से (इस दण्डधौति क्रिया से) रेचन करते हैं (बाहर निकाल देते हें) यह हृदयरोग दण्डधौति के विधान से निश्चय नष्ट हो जाता है।
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