इस अभ्यास को करने से कफ दोष निवारण होता है। नाड़ी निर्मलता को प्राप्त हो जाती है तथा दिव्य दृष्टि (स्वच्छदृष्टि) हो जाती है।
(विशेष - यह क्रिया करने से निद्रा अच्छी आती है, वायुविकार कफ विकार शांत होता है)
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