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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 35
नाडी निर्मलतां याति दिव्यदृष्टिः प्रजायते । एवमभ्यासयोगेन कफदोषं निवारयेत्‌ ।।
इस अभ्यास को करने से कफ दोष निवारण होता है। नाड़ी निर्मलता को प्राप्त हो जाती है तथा दिव्य दृष्टि (स्वच्छदृष्टि) हो जाती है। (विशेष - यह क्रिया करने से निद्रा अच्छी आती है, वायुविकार कफ विकार शांत होता है)
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