मार्जयेन्नवनीतेन दोहयेच्च पुनः पुनः ।
तदग्रं लौहयन्त्रेण कर्षयित्वा शनैः शनैः ॥
पुनः मक्खन से (जिह्वा का) मार्जन करना चाहिये और पुनः-पुनः दोहन करना चाहिये। उसके (जिह्वा के) अग्रभाग को लौहयंत्र (चिमटा) से धीरे-धीरे खींचकर (यह अभ्यास करना चाहिये)।
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