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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 30
तर्जनीमध्यमान्तानां अङ्गुलित्रययोगतः वेशयेद्‌ गलमध्ये तु मार्जयेल्लम्बिकाजडम्‌ । शनैः शनैर्मार्जयित्वा कफदोषं निवारयेत्‌ ॥
तर्जनी, मध्यमा और अनामिका इन तीनों अंगुलियों के योग से गले के मध्य-जिह्वा के मूल को घिसना चाहिये। शने:-शने: (इस प्रकार) मार्जन करके कफदोष का निवारण करना चाहिये।
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