घेरण्ड उवाच-
साधु साधु महाबाहो यन्मान्त्वं परिपृच्छसि ।
कथयामि हि ते वत्स सावधानाऽवधारय ॥
तब घेरण्ड ऋषि ने कहा - हे विशालबाहो! बहुत अच्छा, तुम्हे बहुत साधुवाद है - धन्यवाद है। तुम जो पूछ रहे हो, उसे मैं तुमसे कहता हूँ, उसे सावधान होकर सुनो।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।