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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 26
दन्तमूलं जिह्वामूलं रन्ध्रञ्च कर्णयुग्मयोः । कपालरन्ध्रं पञ्चैते दन्तधौतिं विधीयते ॥
(अब दन्तधौति के प्रकार बताते है-) दन्तमूल (दाँतों की जड़), जिह्वामूल (जिह्वा के मूलस्थान), दोनों कानों के रंध्र (छिद्र), और कपालरंध्र, ये दन्तधौति कहलाते हैं।
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