यामार्द्ध, धारणा शक्ति यावन्न साधयेन्नरः ।
बहिष्कृतमहद्धौतिस्तावच्चेव न जायते ॥
जब तक अर्द्धप्रहर तक धारणशक्ति को व्यक्ति धारण न कर सके, तब तक महाधौति को न करे, अन्यथा उससे कुछ भी नहीं होता है।
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