(यह अग्निसार धौति) उदर रोगों को दूर करने वाली तथा जठराग्नि को बढाने वाली है। यह क्रिया भी (सबके द्वारा सम्भव न होने से) देवों को भी दुर्लभ है, अतीव गोपनीय है इसी धौंति के नियम मात्र से शरीर देवताओं के समान (सुन्दर हो जाता है)।
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