मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 18
वारिसारं परं गोप्यं देहनिर्मलकारकम्‌ । साध्येत्तत्प्रयत्मेन देवदेहं प्रपद्यते ॥
(वारिसार का क्या फल है, यह बताते हैं-) यह वारिसार (नामक अतंर्धौति क्रिया योगियों का विषय होने से) अतीव गोपनीय है। यह देह को निर्मल करने वाली है। अत: इसे प्रयत्नपूर्वक साधना चाहिये। जिससे साक्षात देवताओं के समान देह प्राप्त हो जाती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें