(पुन: वारिसार क्या है - यह बताते हैं) जल को धीरे-धीरे कण्ठ तक पीना चाहिये, पुन: उसे उदर में डुलायें या चलायें और पुन: उस पानी का रेचन अधोमार्ग से कर देना चाहिये या (शौच स्थान या मलद्वार से) निकाल देना चाहिये।
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