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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 16
वातसारं परं गोप्यं देहनिर्मलकारणम्‌ । सर्वरोगक्षयकरं देहानलविवर्द्धकम्‌ ॥
(वातसार का क्या फल है - यह बताते हैं) वातसार क्रिया (योगियों को लाभदायी होने के कारण) अतीव गोपनीय है। यह शरीर को निर्मल करने का कारण है। यह सब रोगों को विनष्ट करने वाली तथा देहाग्नि (जठराग्नि) को बढ़ाने वाली है।
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