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घेरण्ड संहिता • अध्याय 1 • श्लोक 14
वातसारं वारिसारं वह्निसारं बहिष्कृतम्‌ । घटस्य निर्मलार्थाय अन्तर्धौतिश्चतुर्विधा
(अन्तर्धौति क्या हैं?) प्रथम - वातसार, द्वितीय - वारिसार (जल का निकालना), तृतीय - अग्निसार और चतुर्थ - बहिष्कृत, इस प्रकार घट (शरीर) को निर्मल करने की चार प्रकारीय अतंर्धौति हैं।
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