(धौति के प्रकार बताते हैं-) प्रथम - अन्तर्धीति, द्वितीय - दन्तधौति, तृतीय - हृद् धौति और चतुर्थ - मूलशोधन इन चार प्रकारीय धौतियों को करके (योगीजन) घट (शरीर) को निर्मल-स्वच्छ करें।
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