तत्कारि-मत्कारि (उनकी या हमारी) हिंसा करने वाला जो विष वर्द्धित हो रहा है, उसे (ब्रह्मविद्या) जो कि विषों के विष (अर्थात् विषनाशक) विषरूपिणी, विष को दूषित, शोषित, नष्ट एवं हरण करने वाली, ऐसी वह जो स्वयं अहारूपा है, उसके द्वारा घातक विष को, अन्तर्लीन विष को प्रणाशक (नष्ट करने वाले) विष को नष्ट कर दिया गया।
विष को नष्ट करने में इन्द्र के वज्र ने सहयोग प्रदान किया।
(इस निमित्त) आहुति समर्पित है।
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