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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 9
अथ चतुर्थ मासे जठरकरिप्रदेशो भवति । पञ्चमे मासे पृष्ठवंशो भवति । षषे मासे मुखनासिकाक्षिश्रोन्नाणि भवन्ति ।
पश्चात्‌ चौथ महीने गुल्फ (पैर की घुट्ठियाँ, पेट तथा कटि-प्रदेश तैयार हो जाते हैं। पाँचवें महीने पीठ की रीढ़ तैयार होती है। छठे महीने मुख, नासिका, नेत्र और श्रोत्र बन जाते हैं।
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