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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 8
ऋतुकाले सम्प्रयोगादेकरात्रोषित॑ कलिलं भवति सप्तरात्रोषितं बुद्बुदं भवति अर्धमासाभ्यन्तरेण पिण्डो भवति मासाभ्यन्तरण कठिनो भवति मासद्वयेन शिरं सम्पद्यते मासत्रयेण पादप्रवेशो भवति ।
ऋतु काल मे सम्यक्‌ प्रकार से गर्भाधान होने पर एक रात्रि में शुक्र-शोणित के संयोग से कलल बनता है। सात रात में बुद्बुद बनता है। एक पक्ष में उसका पिण्ड (स्थूल आकार) बनता है। वह एक मास मे कठिन होता है। दो महीनों में वह सिर से युक्त होता है, तीन महीने में पैर बनते हैं।
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