शुक्ल, रक्त, कृष्ण, धूप्र, पीत, कपिल ओर पाण्डुर - ये सप्त रूप (रंग) है।
सात धातुओं से निर्मित कैसे है?
जब देवदत्त आदि नामक व्यक्ति को द्रव्य आदि भोग्य-विषय जुड़ते हैं, तब उनके परस्पर अनुकूल होने के कारण षट्-पदार्थ प्राप्त होते हैं जिनसे रस बनता है। रस से रुधिर, रुधिर से मांस, मांस से मेद, मेद से स्रायु, स्रायु से अस्थि, अस्थि से मज्जा और मज्जा से शुक्र - ये सात धातुएँ उत्पन्न होती हैं। पुरुष के शुक्र और स्त्री के रक्त के संयोग से गर्भ का निर्माण होता है।
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