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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 21
सप्तोत्तरं मर्मशतं साशीतिकं सन्धिशतं सनवकं स्रायुशत॑ सप्त शिरासतानि पञ्च मव्जाशतानि अस्थीनि चह वै त्रीणि शतानि षष्टिश्चार्धचतस्रो रोमाणि कोट्यो हृदयं पलान्यष्नै द्रादश पलानि जिह्वा पित्तप्रस्थं कफस्याढकं शुम्लं कुडवं मेदः प्रस्थौ द्वावनियतं मूत्रपुरीषमाहारपरिमाणात्‌ ।
एक सौ सात मर्मस्थान हैं, एक सौ अस्सी संधियाँ हैं, एक सौ नौ स्रायु हैं, सात सौ शिराएँ हैं, पाँच सौ मज्जाएँ हैं, तीन सौ साठ अस्थियाँ हैं, साढ़े चार करोड़ रोम हैं, आठ पल हृदय है, बारह पल जिह्वा है, एक प्रस्थ पित्त, एक अधक कफ, एक कुदव शुक्र तथा दो प्रस्थ वसा (चरबी) है; इसके अतिरिक्त शरीरय आहारक परिमाण से मल-मूत्र का परिमाण अनियमित होता है। [1 पल = 45.5 ग्राम; 1 प्रस्थ = 728 ग्राम; 1 अधक = 2,912 ग्राम; 1 कुदव = 182 ग्राम]
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