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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 2
ॐ पञ्चात्मकं पञ्चसु वर्तमानं षडाश्रयं षड्गुणयोगयुक्तम्‌ | तत्सप्तधातु त्रिमलं द्वियोनि चतुर्विधाहारमयं शरीरं ॥
शरीर पंचात्मक, पाँचों में वर्तमान, छः आश्रयों वाला, छः गुणों के योग से युक्त, सात धातुओं (ऊतक) से निर्मित, तीन मलों से दूषित, दो योनियों से युक्त तथा चार प्रकार के आहार से पोषित होता है।
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