देह-पिण्ड का नाम "शरीर" कैसे होता है?
इसलिये कि ज्ञानाग्नि, दर्शनाग्नि तथा जठराग्नि के रूप मे अग्नि इसमें आश्रय लेता है। इनमें जठराग्नि वह है, जो खाये, पिये, चाटे ओर चूसे हुए पदार्थों को पचाता है। दर्शनाग्नि वह है, जो रूपों को दिखलाता है; ज्ञानाग्नि शुभाशुभ कर्मो को सामने खड़ा कर देता है।
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