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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 17
यदि योन्यां प्रमुञ्चामि तं प्रपद्ये भगवन्तं नारायणं देवम्‌ | अशुभक्षयकर्तारं फलमुक्तिप्रदायकम्‌ । यदि योन्यां प्रमुञ्चामि ध्यायं ब्रह्म सनातनम्‌ ॥
यदि मैं योनि से छूट जाऊँगा तो अशुभ कर्मो का नाश करने वाले और मुक्तिरूप फल प्रदान करने वाले भगवान्‌ नारायण की शरण ग्रहण करूगा। यदि मैं योनि से छूट जाऊँगा तो अशुभ कर्मो का नाश करने वाले और मुक्तिरूप फल प्रदान करने वाले सांख्य और योग का अभ्यास करूंगा। यदि मैं इस बार योनि से छूट गया तो मैं ब्रह्म का ध्यान करूगा।
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