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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 16
यदि योन्यां प्रमुञ्चामि सांख्यं योग॑ समाश्रये । अशुभक्षयकर्तारि फलमुक्तिप्रदायकम्‌ ॥ यदि योन्यां प्रमुज्ञामि तं प्रपद्ये महेश्वरम्‌ । अशुभक्षयकतारं फलमुक्तिप्रदायकम्‌ ॥
यदि इस योनि से मैं छूट जाऊँगा - इस गर्भ के बाहर निकल गया तो अशुभ कर्मो का नाश करने वाले तथा मुक्तिरूप फल को प्रदान करने वाले महेश्वर के चरणों का आश्रय लूँगा।
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