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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 12
व्याकुलितमनसौऽन्धाः खज्ञाः कुब्जा वामना भवन्ति । उन्योन्यवायुपरिपीडितशुक्रदवैध्यादूविधा तनुः स्यात्ततो युग्माः प्रजायन्ते ॥
व्याकुलचित्त होकर समागम करने से अन्धी, कुबड़ी, खोड़ी तथा बौनी संतान उत्पन्न होती है। परस्पर (प्राण) वायु के संघर्ष से शुक्र दो भागों में बंटकर सूक्ष्म हो जाता है, उससे युग्म (जुड़वाँ) संतान उत्पन्न होती है।
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