व्याकुलचित्त होकर समागम करने से अन्धी, कुबड़ी, खोड़ी तथा बौनी संतान उत्पन्न होती है। परस्पर (प्राण) वायु के संघर्ष से शुक्र दो भागों में बंटकर सूक्ष्म हो जाता है, उससे युग्म (जुड़वाँ) संतान उत्पन्न होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गर्भ के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।