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गर्भ • अध्याय 1 • श्लोक 11
पितू रेतोऽतिरिक्तात्‌ पुरुषो भवति । मातुः रेतोऽतिरिक्तात्स्त्रियो भवन्त्युभयोर्बीजतुल्यत्वान्नपुंसको भवति ।
पिता के शुक्र की अधिकता से पुत्र, माता के रुधिर की अधिकता से पुत्री तथा शुक्र ओर शोणित दोनों के तुल्य होने से नपुंसक संतान उत्पन्न होती है।
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