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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 8
भजन्भक्त्या विहीनो यः स चाण्डालोऽभिधीयते । चाण्डालोऽपि भजन्भक्त्या ब्राह्मणेभ्योऽधिको मतः ॥
जो भक्तिविहीन होकर भजन करता है, वह चाण्डाल है और जो जन्म से चाण्डाल होकर भी मेरा भक्तिपूर्वक भजन करता है, वह उस ब्राह्मण से श्रेष्ठ है।
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