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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 6
अव्यक्तोपासनाद्दुःखमधिकं तेन लभ्यते । व्यक्तस्योपासनात्साध्यं तदेवाव्यक्तभक्तितः ॥
अव्यक्त ब्रह्म की उपासना करने वाले जनों को अधिक क्लेश भोगना पड़ता है। जो व्यक्तस्वरूप की भक्ति से प्राप्त होता है, वही अव्यक्त की उपासना से होता है।
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