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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 5
सोऽपि मामेत्यनिर्देश्यं मत्परो य उपासते । संसारसागरादस्मादुद्धरामि तमप्यहम् ॥
ब्रह्म का ध्यान करता है तथा जो जानने में अशक्य मेरी उपासना करता है, वह भी मुझे ही प्राप्त करता है, उसका भी मैं संसार सागर से उद्धार करता हूँ।
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