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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 37
अहमेवाखिलं विश्वं सृजामि विसृजामि च । औषधीस्तेजसा सर्वा विश्वं चाप्याययाम्यहम् ॥
मैं ही सम्पूर्ण संसार को उत्पन्न कर उसका संहार करता हूँ और अपने तेज से औषधि और जगत्‌ को मैं ही पुष्ट करता हूँ।
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