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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 33
सत्त्वाधिकः सुखं ज्ञानं कर्मसंगं रजोऽधिकः । तमोऽधिकश्च लभते निद्रालस्यं सुखेतरत् ॥
सत्त्वगुण अधिक होने से सुख और ज्ञान की, रजोगुण अधिक होने से कर्म की और तमोगुण अधिक होने से सुख से इतर निद्रा और आलस्य की प्राप्ति होती है।
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