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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 31
गुणैस्त्रिभिरियं देहे बध्नाति पुरुषं दृढम् । यदा प्रकाशः शान्तिश्च वृद्धे सत्त्वं तदाधिकम् ॥
प्रकृति के तीन गुण ही इस पुरुष को देह में बाँधते हैं, जिस समय देह में शान्ति और प्रकाश की वृद्धि हो, तब सत्त्वगुण की वृद्धि होती है।
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