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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 30
एतदेव परं ब्रह्म ज्ञेयमात्मा परोऽव्ययः । गुणान्प्रकृतिजान्भुङ्क्ते पुरुषः प्रकृतेः परः ॥
यही परब्रह्म ज्ञेय है, यही आत्मा, पर, अव्यय तथा प्रकृति से परे पुरुष कहलाता है। यह प्रकृति से उत्पन्न हुए गुणों को भोगता है।
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