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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 29
दुर्ज्ञेयं चातिसूक्ष्मत्वाद्दीप्तानामपि भासकम् । ज्ञेयमेतादृशं विद्धि ज्ञानगम्यं पुरातनम् ॥
अत्यन्त सूक्ष्म होने से वह जाना नहीं जाता, ज्योतियों को भी प्रकाशित करने वाला है, इस प्रकार ज्ञान से जानने योग्य पुरातन पुरुष को ज्ञेय ब्रह्म जानो।
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