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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 27
यदनादीन्द्रियैर्हीनं गुणभुग्गुणवर्जितम् । अव्यक्तं सदसद्भिन्नमिन्द्रियार्थावभासकम् ॥
जो अनादि, इन्द्रियरहित, सत्-रज-तम आदि गुणों का भोक्ता, किंतु गुणवर्जित, अव्यक्त, सत्-असत्से परे तथा इन्द्रियों के विषयोंका प्रकाशक है,
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