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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 26
तज्ज्ञानविषयं राजन्ब्रवीमि त्वं शृणुष्व मे । यज्ज्ञात्वैति च निर्वाणं मुक्त्वा संसृतिसागरम् ॥
हे राजन्! इस ज्ञान के विषय को मैं कहता हूँ, तुम श्रवण करो, जिसके जानने से संसार सागर से छूटकर मुक्त हो जाओगे।
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