तज्ज्ञानविषयं राजन्ब्रवीमि त्वं शृणुष्व मे ।
यज्ज्ञात्वैति च निर्वाणं मुक्त्वा संसृतिसागरम् ॥
हे राजन्! इस ज्ञान के विषय को मैं कहता हूँ, तुम श्रवण करो, जिसके जानने से संसार सागर से छूटकर मुक्त हो जाओगे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
गणेशगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
गणेशगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।