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गणेशगीता • अध्याय 9 • श्लोक 24
आर्जवं गुरुशुश्रूषा विरक्तिश्चेन्द्रियार्थतः । शौचं क्षान्तिरदम्भश्च जन्मादिदोषवीक्षणम् ॥
सरलता, गुरुशुश्रूषा, इन्द्रियों का विषयों से वैराग्य, पवित्रता, सहनशीलता, पाखण्ड का त्याग, जन्ममरणादि में दोषदृष्टि,
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