इच्छाव्यक्तं धृतिद्वेषौ सुखदुःखे तथैव च ।
चेतनासहितश्चायं समूहः क्षेत्रमुच्यते ॥
अव्यक्त (मूल प्रकृति), इच्छा, धैर्य, द्वेष, सुख-दुःख और चेतनासहित यह सारा समूह क्षेत्र कहलाता है।
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