श्रीगजानन उवाच-
पञ्च भूतानि तन्मात्राः पञ्च कर्मेन्द्रियाणि च ।
अहंकारो मनो बुद्धिः पञ्च ज्ञानेन्द्रियाणि च ॥
श्रीगणेशजी बोले - (पृथ्वी, जल आदि) पाँच महाभूत और उनकी (गन्ध, रस आदि) तन्मात्राएँ, पाँच कर्मेन्द्रियाँ, अहंकार, मन, बुद्धि और पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ,
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